Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद स्वाध्याय

Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद स्वाध्याय

आज हम इस वेबसाईट पर Maharashtra board Lokbharti Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद स्वाध्याय(Barshahi Jalad) के बारे में चर्चा करने जा रहे है। इस वेबसाइट पर आपको Chapter 12 बरषहिं जलद कविता के प्रश्नोत्तर मिल जायेंगे तथा इस कविता Chapter 12 बरषहिं जलद (Barshahi jalad) का भावार्थ , स्वाध्याय, पद्य विश्लेषण, सरल अर्थ और व्याकरण संबधित सभी प्रश्नो के हल Pdf स्वरुप में मिल जायेंगे। आप इन सभी स्वाध्याय प्रश्नोत्तर को डाउनलोड कर सकते है। यदि आप कक्षा 10 वीं लोकभारती Digest की तलाश में हैं तो आप सही जगह पर आए हैं। हमारे विशेषज्ञ शिक्षकों टीम ने इस पाठ का अध्ययन किया है और उन छात्रों के लिए नोट्स तैयार किए हैं जो इस पाठ को सारांशित करने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि आप हमारी Pdf फाइलों का उपयोग करके अधिक अंक प्राप्त कर सकते हैं। आपको बता दें कि इस विषय से जुड़े सभी सवालों के जवाब हमारी विशेषज्ञ शिक्षकों की टीम ने दिए हैं। यहां आपको तीन Pdf फाइलें मिलेंगी, जिनमें से पहली Pdf फाइल में टेक्स्ट बुक के सवालों के जवाब होंगे और दूसरी Pdf फाइल में आपको अभ्यास के लिए अतिरिक्त प्रश्न मिलेंगे। तीसरी और अंतिम Pdf फाइलों में आपको इस अध्याय का पूरा अध्ययन मिलेगा।

आपको मार्गदर्शिका/गाइड के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमारे Pdf स्वाध्याय का उपयोग करने के बाद आपको उनकी आवश्यकता नहीं होगी। इस पोस्ट के अंत में आपको सभी Pdf फाइलें मिल जाएंगी, इसलिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप पूरा लेख पढ़ें।

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Maharashtra state Board10thChapter 12 बरषहिं जलद

Class 10 Hindi Lokbharti Chapter 12 बरषहिं जलद questions answers:

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यहां आपको वह मिलेगा जिसका आप इंतजार कर रहे थे। शिक्षक, माता-पिता और छात्र, अब आप महाराष्ट्र राज्य बोर्ड द्वारा कक्षा 10वीं हिंदी लोकभारती Chapter 12 बरषहिं जलद स्वाध्याय की Pdf फाइल नीचे पा सकते हैं। नीचे आप पीडीएफ फाइल देख सकते हैं जिसे डाउनलोड किया जा सकता है लेकिन आगे बढ़ने से पहले, कृपया नीचे दिए गए हमारे दिशानिर्देशों का पालन करें।

पीडीएफ फाइल कैसे डाउनलोड करें?

नीचे आपको हमारी Pdf फाइल दिखाई देगी जिसके नीचे आपको एक मेन्यू बटन भी दिखाई देगा। अगला पेज देखने के लिए आपको नेक्स्ट बटन पर क्लिक करना होगा। इस तरह आप सभी प्रश्न और उत्तर पीडीएफ फाइल में देख पाएंगे।

अगर आप नीचे दी गई Pdf फाइल को डाउनलोड करना चाहते हैं तो “Download Now” बटन पर क्लिक करें। बटन क्लिक करने के बाद 15 सेकंड तक प्रतीक्षा करें। उसके बाद आपको प्रश्न पत्र की Pdf फाइल डाउनलोड करने को मिल जाएगी।

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Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद भावार्थ:

Lokbharti Class 10 Hindi Chapter 12 Barshahi Jalad
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बरषहिं जलद चौपाइयों और दोहों का सरल अर्थ

1. घन घमंड नभ …………………………… जिमि जिव हरि पाई।। (चौपाई)

कवि कहते हैं कि आकाश में बादल उमड़-घुमड़कर भयंकर गर्जना कर रहे हैं। (श्रीरामजी कह रहे हैं कि) प्रिया (सीता जी) के बिना मेरा मन डर रहा है। बिजली आकाश में ऐसे चमक रही है, जैसे दुष्ट व्यक्ति की मित्रता स्थिर नहीं रहती। यानी वह चमकती है और चमककर लुप्त हो जाती है।

बादल पृथ्वी के नजदीक आकर (नीचे उतरकर) बरस रहे हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे विद्वान व्यक्ति विद्या प्राप्त कर विनम्र हो जाते हैं। बूंदों की चोट पहाड़ों पर पड़ रही है। पहाड़ बूंदों के प्रहार को इस प्रकार शांत भाव से सह रहे हैं, जैसे संत पुरुष दुष्टों के कटु वचनों को सह लेते हैं।

छोटी नदियाँ वर्षा के जल से भरकर अपने किनारों को तोड़ती हुई आगे बढ़ती जा रही हैं, जैसे मामूली धन पाकर भी दुष्ट लोग इतराने लगते हैं (यानी मर्यादा का त्याग कर देते हैं)। पृथ्वी पर गिरते ही पानी गँदला हो गया है, मानो प्राणी से माया लिपट गई हो।

वर्षा का पानी एकत्र होकर तालाबों में भर रहा है। जैसे एक-एक कर सद्गुण सज्जन व्यक्ति के पास चले आते हैं। नदी का पानी समुद्र में जाकर उसी प्रकार स्थिर हो जाता है जिस प्रकार जीव हरि (ईश्वर) को प्राप्त कर अचल (आवागमन से मुक्त) हो जाता है।

2. हरित भूमि …………………………… होहिं सद्ग्रंथ।। (दोहा)

पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरीभरी हो गई है, जिससे रास्तों का पता नहीं चलता है। यह दृश्य ऐसा लगता है, जैसे पाखंडी के पाखंड भरे मत के प्रचार से सद्ग्रंथ लुप्त हो जाते हैं।

3. दादुर धुनि चहुँ उपजे ग्याना।। (चौपाई)

कवि कहते हैं कि वर्षा काल में चारों दिशाओं में मेढकों की ध्वनि ऐसी (सुहावनी) लगती है मानो विद्यार्थियों का समूह वेद-पाठ कर रहा हो। अनेक वृक्षों में नई-नई कोंपलें आ गई हैं, जिससे वे ऐसे हरेभरे तथा सुशोभित हो गए हैं, जैसे साधना करने वाले किसी व्यक्ति का मन ज्ञान प्राप्त करने पर प्रफुल्लित हो जाता है।

(बरसात के दिनों में) मदार और जवासा के पौधे पत्तों से रहित हो गए हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो अच्छे शासक के राज्य में दुष्टों का धंधा जाता रहा हो (खत्म हो गया हो)। धूल खोजने पर भी कहीं नहीं मिलती है। जैसे क्रोध धर्म को दूर कर देता है, उसी तरह वर्षा ने धूल को नष्ट कर दिया है।

अनाज से युक्त (लहलहाती हुई हरी-भरी खेती) पृथ्वी कुछ इस : प्रकार शोभायमान हो रही है, जैसे उपकार करने वाले व्यक्ति शोभायमान होते हैं। रात के अंधकार में जुगनू चारों ओर दिखाई दे रहे हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे घमंडियों का समूह एकत्र हो गया है।

चतुर किसान अपनी फसलों की निराई कर रहे हैं। (अपनी फसल से घास-फूस निकालकर फेंक रहे हैं)। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे विद्वान लोग मोह, मद, माया का त्याग कर रहे हों।

बरसात के दिनों में चक्रवाक पक्षी कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं। इससे ऐसा लग रहा है जैसे कलियुग में धर्म पलायन कर गया हो।

यह पृथ्वी अनेक प्रकार के जीवों से भरी पड़ी है। यह उसी तरह शोभायमान हो रही है, जैसे अच्छे राजा के राज्य में प्रजा की वृद्धि (विकास) होती है।

यहाँ-वहाँ अनेक सही थककर इस तरह ठहरे हुए हैं, जैसे मनुष्य को ज्ञान प्राप्त होने पर इंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं और विषयों की ओर’ जाना छोड़ देती हैं।

4. कंबहुँ प्रबल …………………………… कुसंग-सुसंग।। (दोहा)

कभी-कभी वायु बहुत तेज गति से चलने लगती है। इससे बादल यहाँ-वहाँ गायब हो जाते हैं। यह दृश्य उसी प्रकार लगता है जैसे परिवार में कुपुत्र के उत्पन्न होने से कुल के उत्तम धर्म (श्रेष्ठ आचरण) नष्ट हो जाते हैं।

कभी (बादलों के कारण) दिन में घोर अंधकार छा जाता है और कभी सूर्य प्रकट हो जाता है। तब लगता है, जैसे बुरी संगति पाकर ज्ञान नष्ट हो गया हो और अच्छी संगति पाकर ज्ञान उत्पन्न हो गया हो।

Lokbharti Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद सरल अर्थ:

Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद स्वाध्याय
Class 10 Hindi Chapter 12 Barshahi Jalad Saral Arth

बरषहिं जलद चौपाइयों और दोहों का सरल अर्थ

1. घन घमंड नभ …………………………… जिमि जिव हरि पाई।। (चौपाई)

कवि कहते हैं कि आकाश में बादल उमड़-घुमड़कर भयंकर गर्जना कर रहे हैं। (श्रीरामजी कह रहे हैं कि) प्रिया (सीता जी) के बिना मेरा मन डर रहा है। बिजली आकाश में ऐसे चमक रही है, जैसे दुष्ट व्यक्ति की मित्रता स्थिर नहीं रहती। यानी वह चमकती है और चमककर लुप्त हो जाती है।

बादल पृथ्वी के नजदीक आकर (नीचे उतरकर) बरस रहे हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे विद्वान व्यक्ति विद्या प्राप्त कर विनम्र हो जाते हैं। बूंदों की चोट पहाड़ों पर पड़ रही है। पहाड़ बूंदों के प्रहार को इस प्रकार शांत भाव से सह रहे हैं, जैसे संत पुरुष दुष्टों के कटु वचनों को सह लेते हैं।

छोटी नदियाँ वर्षा के जल से भरकर अपने किनारों को तोड़ती हुई आगे बढ़ती जा रही हैं, जैसे मामूली धन पाकर भी दुष्ट लोग इतराने लगते हैं (यानी मर्यादा का त्याग कर देते हैं)। पृथ्वी पर गिरते ही पानी गँदला हो गया है, मानो प्राणी से माया लिपट गई हो।

वर्षा का पानी एकत्र होकर तालाबों में भर रहा है। जैसे एक-एक कर सद्गुण सज्जन व्यक्ति के पास चले आते हैं। नदी का पानी समुद्र में जाकर उसी प्रकार स्थिर हो जाता है जिस प्रकार जीव हरि (ईश्वर) को प्राप्त कर अचल (आवागमन से मुक्त) हो जाता है।

2. हरित भूमि …………………………… होहिं सद्ग्रंथ।। (दोहा)

पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरीभरी हो गई है, जिससे रास्तों का पता नहीं चलता है। यह दृश्य ऐसा लगता है, जैसे पाखंडी के पाखंड भरे मत के प्रचार से सद्ग्रंथ लुप्त हो जाते हैं।

3. दादुर धुनि चहुँ उपजे ग्याना।। (चौपाई)

कवि कहते हैं कि वर्षा काल में चारों दिशाओं में मेढकों की ध्वनि ऐसी (सुहावनी) लगती है मानो विद्यार्थियों का समूह वेद-पाठ कर रहा हो। अनेक वृक्षों में नई-नई कोंपलें आ गई हैं, जिससे वे ऐसे हरेभरे तथा सुशोभित हो गए हैं, जैसे साधना करने वाले किसी व्यक्ति का मन ज्ञान प्राप्त करने पर प्रफुल्लित हो जाता है।

(बरसात के दिनों में) मदार और जवासा के पौधे पत्तों से रहित हो गए हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो अच्छे शासक के राज्य में दुष्टों का धंधा जाता रहा हो (खत्म हो गया हो)। धूल खोजने पर भी कहीं नहीं मिलती है। जैसे क्रोध धर्म को दूर कर देता है, उसी तरह वर्षा ने धूल को नष्ट कर दिया है।

अनाज से युक्त (लहलहाती हुई हरी-भरी खेती) पृथ्वी कुछ इस : प्रकार शोभायमान हो रही है, जैसे उपकार करने वाले व्यक्ति शोभायमान होते हैं। रात के अंधकार में जुगनू चारों ओर दिखाई दे रहे हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे घमंडियों का समूह एकत्र हो गया है।

चतुर किसान अपनी फसलों की निराई कर रहे हैं। (अपनी फसल से घास-फूस निकालकर फेंक रहे हैं)। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे विद्वान लोग मोह, मद, माया का त्याग कर रहे हों।

बरसात के दिनों में चक्रवाक पक्षी कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं। इससे ऐसा लग रहा है जैसे कलियुग में धर्म पलायन कर गया हो।

यह पृथ्वी अनेक प्रकार के जीवों से भरी पड़ी है। यह उसी तरह शोभायमान हो रही है, जैसे अच्छे राजा के राज्य में प्रजा की वृद्धि (विकास) होती है।

यहाँ-वहाँ अनेक सही थककर इस तरह ठहरे हुए हैं, जैसे मनुष्य को ज्ञान प्राप्त होने पर इंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं और विषयों की ओर’ जाना छोड़ देती हैं।

4. कंबहुँ प्रबल …………………………… कुसंग-सुसंग।। (दोहा)

कभी-कभी वायु बहुत तेज गति से चलने लगती है। इससे बादल यहाँ-वहाँ गायब हो जाते हैं। यह दृश्य उसी प्रकार लगता है जैसे परिवार में कुपुत्र के उत्पन्न होने से कुल के उत्तम धर्म (श्रेष्ठ आचरण) नष्ट हो जाते हैं।

कभी (बादलों के कारण) दिन में घोर अंधकार छा जाता है और कभी सूर्य प्रकट हो जाता है। तब लगता है, जैसे बुरी संगति पाकर ज्ञान नष्ट हो गया हो और अच्छी संगति पाकर ज्ञान उत्पन्न हो गया हो।

बरषहिं जलद Summary in Hindi

विषय-प्रवेश : अवधी बोली में लिखा गया ‘रामचरितमानस’ विश्व के अमूल्य ग्रंथों में से एक है। प्रस्तुत काव्य खंड इसी ग्रंथ से लिया गया है। चौपाई और दोहों जैसे लोकप्रिय छंदों में प्रस्तुत इस काव्य खंड में तुलसीदासजी ने वर्षा ऋतु का सुंदर वर्णन किया है। इस काव्य खंड में उन्होंने वर्षा ऋतु से संबंधित विभिन्न वस्तुओं को जीवन से जोड़कर देखा है।

यह काव्य खंड सीता हरण के पश्चात का है। श्रीराम और लक्ष्मण जी सीता जी की खोज में वन में भटक रहे हैं। बरसात की ऋत आ चुकी है पर सीता जी का पता नहीं चल सका है। कवि ने इस काव्य खंड में श्रीराम के मन की व्याकुलता का चित्रण किया है।

Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद स्वाध्याय: Notes

Class 10 Hindi Chapter 12 Barshahi Jalad notes:
Class 10 Hindi Chapter 12 Barshahi Jalad notes

जब हम कक्षा 10 का हिंदी लोकभारती पाठ 12 "बरषहिं जलद" पढ़ रहे हैं, तो हम देख सकते हैं कि इस पाठ के बीच में कई प्रश्न पूछे जाते हैं और छात्रों से उनके उत्तर की अपेक्षा की जाती है। कुछ छात्रों को उत्तर देते समय कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन हम आपसे वादा करते हैं कि हमारे उत्तर की समीक्षा करने के बाद, आपको ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए आत्मविश्वास मिलेगा। हमारे विशेषज्ञ टीम शिक्षक ने प्रश्न पत्र को कई भागों में विभाजित किया है, जिससे आपको पाठ को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। निम्नलिखित मुद्डो पर एक नज़र डालें:

  • Chapter 12 बरषहिं जलद (आकलन कृती)
  • Chapter 12 बरषहिं जलद (मुहावरा)
  • Chapter 12 बरषहिं जलद (अतिरिक्त प्रश्नोत्तरे)
  • Chapter 12 बरषहिं जलद (व्याकरण)
  • Chapter 12 बरषहिं जलद (शब्द संपदा)
  • Chapter 12 बरषहिं जलद (विरुद्धार्थी शब्द)

Class 10 Hindi Chapter 12 बरषहिं जलद Question Bank

Question bank for class 10 Hindi Chapter 12 Barshahi Jalad :

जो छात्र वार्षिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और बोर्ड में अधिक अंक प्राप्त करना चाहते हैं, वे हमारे प्रश्न बैंक का उपयोग कर सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रश्न आपकी अंतिम परीक्षा में निश्चित रूप से पूछे जा सकते हैं।
हमारी पीडीएफ फाइल के अंत में, आपको कक्षा 10वी का हिंदी लोकभारती पाठ 12 " 12 बरषहिं जलद" मिलेगा। हमारी विशेषज्ञ टीम आपको अधिक अंक प्राप्त करने में मदद करने के लिए प्रश्न बैंक पर भरोसा करती है।
हमारे शिक्षकों की विशेषज्ञ टीम ने इन सवालों के बेहतरीन जवाब तैयार किए हैं। इन सभी सवालों के जवाब हमारी पीडीएफ फाइल में हैं जो नीचे दी गई है। आप इसे अपने खाली समय में अध्ययन करने के लिए डाउनलोड कर सकते हैं। कक्षा 10 वीं हिंदी लोकभारती पाठ 12 "बरषहिं जलद" स्वाध्याय पीडीएफ फाइल में आपको महत्वपूर्ण प्रश्न बैंक समाधान मिलेंगे।
हमें उम्मीद है कि यह प्रश्न बैंक आपकी परीक्षा की तैयारी में आपकी थोड़ी मदद करेगा।

Question bank

निम्नलिखित अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए:

(i) संतों की सहनशीलता।

(ii) जीव की निश्चिंतता।

(iii) रास्तों का अदृश्य हो जाना।

(iv) विद्वानों की विनम्रता

उत्तर:

(i) खल के बचन संत सह जैसे।

(ii) होई अचल जिमि जिव हरि पाई।

(iii) हरित भूमि तृन संकुल, समुझि परहि नहिं पंथ।

(iv) जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ।

कृति 2: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.

निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए:

(i) थिर – ………………………………………..

(ii) जथा – ………………………………………..

(iii) सदगुन – ………………………………………..

(iv) अघात – ………………………………………..

उत्तर:

(i) थिर -स्थिर

(ii) जथा – यथा

(iii) सदगुन – सद्गुण

(iv) अघात – आघात।

प्रश्न 2.

निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:

(i) जलनिधि = ……………………

(ii) गिरि = ……………………

(iii) नदी = ……………………

(iv) जल = ……………………

उत्तर:

(i) जलनिधि = समुद्र

(ii) गिरि = पहाड़

(iii) नदी = सरिता

(iv) जल = पानी।

उत्तर लिखिए:

इनकी तुलना की गई है, इनसे –

(i) रात के अंधकार में जुगनू – [ ]

(ii) ससि (अनाज) से भरपूर घरती – [ ]

(iii) कृषि को निराने वाले किसान – [ ]

(iv) दिखाई न देने वाला चक्रवाक – [ ]

उत्तर:

(i) रात के अंधकार में जुगनू – [घमंडियों के समाज से]

(ii) ससि (अनाज) से भरपूर धरती – [उपकारी की संपति से]

(iii) कृषि को निराने वाले किसान – [मोह-मद-मान त्यागने वाले विद्वान से]

(iv) दिखाई न देने वाला चक्रवाक – [कलियुग पाकर भाग जाने वाले धर्म से]

प्रश्न 3.

निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश में प्रयुक्त शब्द खोजकर लिखिए:

(i) ग्रह – [ ]

(ii) पेड़ – [ ]

(iii) पत्ते – [ ]

(iv) उपग्रह – [ ]

(v) पौधा – [ ]

उत्तर:

(i) ग्रह – [पतंग (सूर्य)]

(ii) पेड़ – [बिटप]

(iii) पत्ते – [पात]

(iv) उपग्रह – [महि]

(v) पौधा – [अर्क-जवास]

प्रश्न 4.

तालिका पूर्ण कीजिए:

इन्हें – यह कहा है

(i) ………………….. – बटु समुदाय

(ii) (नव पल्लव वाले) वृक्ष – …………………..

(iii) (लुप्त हुई) धूल – …………………..

(iv) ………………….. – ज्ञान उत्पन्न हुआ

उत्तर:

इन्हे – यह कहा है

(i) दादुर – बटु समुदाय

(ii) (नव पल्लव वाले) वृक्ष – ज्ञान प्राप्त कर प्रफुल्लित होने वाला साधक

(iii) (लुप्त हुई) धूल – क्रोध के कारण लुप्त हुआ धर्म

(iv) (विषयों से विरक्त) मनुष्य – ज्ञान उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 5.

उत्तर लिखिए:

पद्यांश में आया –

(i) एक प्रसिद्ध धर्मग्रंथ – [ ]

(ii) चित्त का मनोविकार या उग्र भाव – [ ]

(iii) एक प्रसिद्ध पक्षी – [ ]

(iv) वह शब्द, जिसके दो अर्थ हैं, जिनमें से एक का अर्थ सूर्य है – [ ]

उत्तर:

(i) एक प्रसिद्घ धर्मग्रंथ – [वेद]

(ii) चित्त का मनोविकार या उग्र भाव – [क्रोध]

(iii) एक प्रसिद्ध पक्षी – [चक्रवाक (चकवा)]

(iv) वह शब्द, जिसके दो अर्थ हैं, जिनमें से एक का अर्थ सूर्य है – [पतंग]

प्रश्न 6.

निम्न अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए:

(i) कुसंग से ज्ञान नष्ट होना और सुसंग से ज्ञान उत्पन्न होना। – [ ]

उत्तर:

(i) कुसंग से ज्ञान नष्ट होना और सुसंग से ज्ञान उत्पन्न होना। – बिनसइ-उपजइ म्यान जिमि, पाइ कुसंग-सुसंग

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.

निम्नलिखित शब्दों के अर्थ वाले शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए:

(i) हुए – ……………………….

(ii) जैसे – ……………………….

(iii) कहीं – ……………………….

(iv) की – ……………………….

उत्तर:

(i) हुए – भए, भयऊ।

(ii) जैसे – जनु, जस।

(iii) कहीं – कतहुँ।

(iv) की – कै।

प्रश्न 2.

निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:

(i) दादुर

(ii) धूरी (धूल)

(iii) धर्म

(iv) प्रजा

उत्तर:

(i) दादुर – पुल्लिग

(ii) धूरी (धूल) – स्त्रीलिंग

(iii) धर्म – पुल्लिग

(iv) प्रजा – स्त्रीलिंग।

कृति 3 : (सरल अर्थ)

प्रश्न.

उपर्युक्त पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों (दोहा) का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

उत्तर :

कभी-कभी वायु बहुत तेज गति से चलने लगती है। इससे बादल यहाँ-वहाँ गायब हो जाते हैं। यह दृश्य उसी प्रकार लगता है जैसे परिवार में कुपुत्र के उत्पन्न होने से कुल के उत्तम धर्म (श्रेष्ठ आचरण) नष्ट हो जाते हैं। कभी (बादलों के कारण) दिन में घोर अंधकार छा जाता है और कभी सूर्य प्रकट हो जाता है। तब लगता है, जैसे बुरी संगति पाकर ज्ञान नष्ट हो गया हो और अच्छी संगति पाकर ज्ञान उत्पन्न हो गया हो।

भाषा अध्ययन (व्याकरण)

प्रश्न. सूचनाओं के अनुसार कृतियों कीजिए :

1. शब्द भेद :

प्रश्न.

अधोरेखांकित शब्दों के शब्दभेद पहचानकर लिखिए :

(i) भूमि परत भा ढाबर पानी।

(i) नव पल्लव भए बिटप अनेका।

उत्तर:

(i) पानी-द्रव्यवाचक संज्ञा

(ii) नव-गुणवाचक विशेषण।

2. अव्यय:

प्रश्न.

निम्नलिखित अव्ययों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) नहीं

(i) इसलिए।

उत्तर :

(i) जनक कॉलेज नहीं जाता।

(ii) बेचन बिजली का बिल अदा नहीं कर पाया, इसलिए बिजली आपूर्ति खंडित हो गई।

3. संधि :

प्रश्न.

कृति पूर्ण कीजिए:

संधि शब्द – संधि विच्छेद – संधि भेद

…………………… – विद्या + अर्थी – ……………………

अथवा

जगन्नाथ – …………………… – ……………………

उत्तर:

संधिशब्द – संधि विच्छेद – संधि भेद

विद्यार्थी – विद्या + अर्थी – स्वर संधि

अथवा

जगन्नाथ – जगत् + नाथ – व्यंजन संधि

4. सहायक क्रिया:

प्रश्न.

निम्नलिखित वाक्यों में सहायक क्रिया पहचानकर उनका मूल रूप लिखिए:

(i) बादल पृथ्वी के नजदीक आकर बरस रहे हैं।

(ii) दुष्ट लोग थोड़ा धन पाकर भी इतराने लगते हैं।

उत्तर:

सहायक क्रिया – मूल रूप

(i) रहे – रहना

(ii) लगने – लगना

5. प्रेरणार्थक क्रिया:

प्रश्न.

निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए:

(i) सहना

(ii) गिरना।

उत्तर:

क्रिया – प्रथम प्रेरणार्थक रूप – द्वितीय प्रेरणार्थक रूप

(i) सहना – सहाना – सहवाना

(ii) गिरना – गिराना – गिरवाना

6. मुहावरे:

प्रश्न 1.

निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:

(i) आँखें फाड़कर देखना

(ii) रुआँसा होना।

उत्तर:

(i) आँखें फाड़कर देखना।

अर्थ: आश्चर्य से देखना।

वाक्य: मनीष सर्कस के कलाकारों के करतब आँखें फाड़कर देख रहा था।

(ii) रुआँसा होना।

अर्थ: उदास होना।

वाक्य: मालिक की झिड़कियाँ खाकर नौकर रुआँसा हो गया।

प्रश्न 2.

अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए: (हामी भरना, करवट बदलना)

आखिरकार रंजन ने शादी करने के लिए स्वीकृति दी।

उत्तर:

आखिरकार रंजन ने शादी करने के लिए हामी भरी।

7. कारक:

प्रश्न.

निम्नलिखित वाक्य में प्रयुक्त कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए:

(i) छोटी-छोटी नदियाँ वर्षा के जल से भर जाती हैं।

(ii) नदी अपने किनारों को तोड़ती हुई आगे बढ़ जाती है।

उत्तर:

(i) वर्षा के-संबंध कारक

(ii) किनारों को-कर्म कारक ।

8. विरामचिह्न:

प्रश्न.

निम्नलिखित वाक्यों में यथास्थान उचित विरामचिह्न लगाकर वाक्य फिर से लिखिए:

(i) पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरी हो गई है जिससे रास्तों का पता नहीं चलता

(ii) हरी भरी फसलों से युक्त पृथ्वी कैसी लग रही है

उत्तर:

(i) पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरी हो गई है, जिससे रास्तों का पता नहीं चलता।

(ii) हरी-भरी फसलों से युक्त पृथ्वी कैसी लग रही है?

9. काल परिवर्तन:

प्रश्न.

निम्नलिखित वाक्यों का सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:

(i) प्रियाहीन मेरा मन डरता है। (पूर्ण वर्तमानकाल)

(ii) बादल पृथ्वी के नजदीक आकर बरस रहे हैं। (सामान्य भविष्यकाल)

उत्तर:

(i) प्रियाहीन मेरा मन डरा है।

(ii) बादल पृथ्वी के नजदीक आकर बरसेंगे।

10. वाक्य भेद:

प्रश्न 1.

निम्नलिखित वाक्यों का रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए:

(i) बादल गरज रहे हैं और बिजली चमक रही है।

(ii) अनेक वृक्षों में नई-नई कोंपलें आ गई हैं, जिससे वे हरे-भरे तथा सुशोभित हो गए हैं।

उत्तर:

(i) संयुक्त वाक्य

(ii) मिश्र वाक्य।

प्रश्न 2.

निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए:

(i) कलियुग में धर्म पलायन कर जाता है। (प्रश्नवाचक वाक्य)

(ii) संत पुरुष दुष्टों के वचन सहते हैं। (निषेधवाचक वाक्य)

उत्तर:

(i) क्या कलियुग में धर्म पलायन कर जाता है?

(ii) संत पुरुष दुष्टों के वचन नहीं सहते।

11. वाक्य शुद्धिकरण:

प्रश्न.

निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए:

(i) एक-एक करके सद्गुण सज्जन के पास चला आते है।

(ii) धूल खोजने पे भी कहीं नहीं मिलता है।

उत्तर:

(i) एक-एक कर सद्गुण सज्जन के पास चले आते हैं।

(ii) धूल खोजने पर भी कहीं नहीं मिलती है।

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  1. Chapter 1 भारत महिमा
  2. Chapter 2 लक्ष्मी
  3. Chapter 3 वाह रे! हमदर्द
  4. Chapter 4 मन (पूरक पठन)
  5. Chapter 5 गोवा : जैसा मैंने देखा
  6. Chapter 6 गिरिधर नागर
  7. Chapter 7 खुला आकाश (पूरक पठन)
  8. Chapter 8 गजल
  9. Chapter 9 रीढ़ की हड्डी
  10. Chapter 10 ठेस (पूरक पठन)
  11. Chapter 11 कृषक गान
  12. Chapter 1 बरषहिं जलद

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