Class 10 Hindi Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय

Class 10 Hindi Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय

Maharashtra board Lokbharti Class 10 Hindi Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय (Apani Gandh Nahi Bechunga swadhyay) के बारे में बातचित करने जा रहे है।

अपनी गंध नहीं बेचूँगा” महाराष्ट्र बोर्ड की Lokbharti Class 10 हिंदी कक्षा की पाठ 8 का एक कविता है। यह कविता इंसान की गर्व और स्वतंत्रता के महत्व को उल्लेख करती है, और यह विचार है कि इनकी कीमत कुछ नहीं हो सकती है और किसी भी राशि के लिए बेची नहीं जा सकती। कविता पाठकों को अपनी नैतिकता और मूल्यों पर हटने से मना करती है, और उन्हें संभवत: स्थितियों में भी अपनी मूल्यों पर हटने से बचने की सलाह देती है।

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अपनी गंध नहीं बेचूँगा भावार्थ:

Class 10 Hindi Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय
Apani Gandh Nahi Bechunga summary

विषय-प्रवेश :

स्वाभिमान मनुष्य की थाती है। जिस व्यक्ति में स्वाभिमान की भावना नहीं होती, उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं होता। स्वाभिमानी लोग अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सब कुछ गँवा देते हैं, पर अपने स्वाभिमान पर आँच नहीं आने देते। प्रस्तुत कविता में कवि ने एक ऐसे ही फूल का वर्णन किया है, जो अपने स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए अपना सब कुछ निछावर करने के लिए तत्पर है, पर किसी भी हालत में अपना स्वाभिमान छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। कवि ने इस कविता के द्वारा फूल के इस गुण को मनुष्य को भी अपनाने और स्वाभिमानी रहने की प्रेरणा दी है।

Apani Gandh Nahi Bechunga Saral Arth

1. चाहे सभी सुमन …………………………. सौगंध नहीं बेचूंगा।

स्वाभिमानी फूल अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सब कुछ निछावर करने के लिए तैयार है, पर वह किसी भी हालत में अपने स्वाभिमान पर आँच नहीं आने देना चाहता।

वह कहता है कि चाहे सारे फूल बिक जाएँ, केवल फूल ही नहीं चाहे वे उपवन भी बिक जाएँ, जहाँ सारे फूल उत्पन्न होते हैं। सारी बहार क्यों न बिक जाए, पर वह अपनी सुगंध को, जिसे वह अपना स्वाभिमान मानता है, किसी भी हालत में नहीं बेच सकता।

जिस तरह मनुष्य अपने स्वाभिमान के लिए मर मिट जाता है, पर उस पर आँच नहीं आने देता, उसी तरह यह फूल भी अपनी सुगंध की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

फूल कहता है कि पौधे की जिस डाल ने उसे अपनी गोद में खिलाया था, जिन कोंपलों ने उसे लालिमा प्रदान की थी और जिन काँटों ने लक्ष्मणजी की तरह पहरा देकर उसे तोड़े जाने से बचाया था, उन्हें वह कभी भूल नहीं सकता। उनका वह ऋणी है और उस पर पहला अधिकार इन्हीं का है। वे चाहे उसे नोचें या तोड़ें, वह उफ तक नहीं करेगा। वह कहता है कि वे चाहे मुझे तोड़कर किसी मालिन को दे दें, तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

वह चारों ओर से अपने ऊपर नजरें गड़ाने वालों और उसकी कीमत लगाकर उसे बाजार में बेचने वालों से कहता है कि उसने अपनी सुगंध को न बेचने की जो सौगंध खाई है, वह उसका संस्कार बन गई है और वह उसका सौदा कभी नहीं कर सकता। फूल कहता है कि वह अपनी सुगंध कभी नहीं बेच सकता।

2. मौसम से क्या लेना अनुबंध नहीं बेचूंगा।

फूल कहता है कि मौसम, कैसा भी हो, मौसम का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वह हर स्थिति में अपने आप को स्थिर रखने में सक्षम है। उसे किसी से कुछ भी पाने की आकांक्षा नहीं है। वह लाभ या हानि की कोई परवाह नहीं करता। न उस पर किसी चीज का कोई प्रभाव पड़ता है। और न वह किसी चीज से कभी घबराता है। चाहे उसकी कोमल-कोमल पंखुड़ियों पर भौंरों के गुंजन का सरगम सुनाई देता हो अथवा पतझड़ का मौसम हो, और वह मुरझाई हुई दशा में हो या उस पर कृत्रिम फुहारें डालकर उसे सांत्वना दी जाए, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

वह अपनी बोली लगाने वालों और पल-पल अपनी कीमतें आँकने वालों को संबोधित करते हुए कहता है कि मैंने अपने आप से अपने स्वाभिमान का अनुबंध कर लिया है और यह ठान लिया है कि मैं अपने स्वाभिमान पर कभी आँच नहीं आने दूँगा। मैं उस अनुबंध को किसी भी हालत में दाँव पर नहीं लगा सकता अर्थात मैं उसका कभी सौदा नहीं कर सकता। फूल कहता है कि वह अपनी सुगंध कभी नहीं बेच सकता।

3. मुझको मेरा अंत ……………………… वो प्रतिबंध नहीं बेचूंगा।

फूल कहता है कि इस संसार में जिसका भी जन्म होता है, एक-न-एक दिन उसका अंत होना (मरना) निश्चित है। वह कहता है कि यह बात मुझे अच्छी तरह मालूम है कि एक दिन मैं भी पंखुड़ीपंखुड़ी करके झर जाऊँगा और मेरा अंत हो जाएगा। पर इसके पहले मैं हवा के साथ उड़कर वातावरण में फैलकर एक-एक (फूल) के पास जाऊँगा और मेरी सुगंध उनसे जाने-अनजाने में किए की माफी मांगेगी।

फूल कहता है कि उस दिन बाजार और बाजार में खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों को यह बात समझ में आएगी कि खुद्दारी अर्थात स्वाभिमान क्या होता है और इसके सम्मान के लिए लोग हर प्रकार का त्याग करने के लिए क्यों तत्पर रहते हैं। फूल कहता है कि किसी के हाथों बिकने से तो अच्छा है कि मैं मर जाऊँ और अपने देश की मिट्टी में मिल जाऊँ। वह कहता है कि मैंने अपनी इच्छा से अपने शरीर पर जो प्रतिबंध लगा लिया है, उस प्रतिबंध को मैं कभी नहीं बेच सकता।

(फूल के इस स्वाभिमान को मनुष्य को भी अपनाना चाहिए और उसे भी किसी लालच में आकर कभी अपना स्वाभिमान बेचना नहीं चाहिए।)

Apani Gandh Nahi Bechunga notes:
Class 10 Hindi Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा स्वाध्याय
  1. अध्याय सुमित्रानंदन पंत द्वारा लिखा गया है।
  2. कविता स्वयं और अपनी संस्कृति के प्रति सच्चे होने के महत्व पर प्रकाश डालती है।
  3. कवि इस विचार पर जोर देता है कि व्यक्ति को अपनी पहचान और विरासत को बेचना या उससे समझौता नहीं करना चाहिए।
  4. कविता अपनी संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने और बनाए रखने का आह्वान है।
  5. कविता का स्वर राष्ट्रवादी है और यह सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालती है।
  6. कविता व्यक्तियों को अपनी जड़ों पर गर्व करने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रेरित करती है।

निम्नलिखित मुद्डो पर एक नज़र डालें:

  • आकलन कृती
  • मुहावरा
  • अतिरिक्त प्रश्नोत्तरे
  • व्याकरण
  • शब्द संपदा
  • विरुद्धार्थी शब्द

Question bank for Hindi Chapter 8 Apani Gandh Nahi Bechunga:

प्रश्न 2. उत्तर लिखिए :

(i) गरीब स्त्री की सिफारिश कर आश्रम में दाखिल कराने वाली स्त्री का खर्च ये देंगे –

(ii) आश्रम में स्वावलंबन की मात्रा –

(iii) आश्रम में ये सिखाए जाएँगे –

(iv) आश्रम यह संस्था नहीं होगी –

उत्तर:

(i) गरीब स्त्री की सिफारिश कर आश्रम में दाखिल कराने वाली स्त्री का खर्च ये देंगे – सिफारिश करने वाले लोग।

(ii) आश्रम में स्वावलंबन की मात्रा – यथासंभव।

(iii) आश्रम में ये सिखाए जाएँगे – उपयोगी उद्योग।

(iv) आश्रम यह संस्था नहीं होगी – शिक्षा संस्था।

कृति 3 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :

(i) अखबार = ……………………..

(ii) व्यवस्था = ……………………..

(iii) बेखटक = ……………………..

(iv) बोझ = ……………………..

उत्तर:

(i) अखबार = समाचारपत्र

(ii) व्यवस्था = इंतजाम

(iii) बेखटक = अर्शक

(iv) बोझ = भार।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :

(i) पुरुष x ………………………………

(ii) गरीब x ………………………………

(iii) स्वतंत्र x ………………………………

(iv) मान्य x ………………………………

उत्तर:

(i) पुरुष x स्त्री

(i) गरीब x अमीर

(iii) स्वतंत्र x परतंत्र

(iv) मान्य x अमान्य।

कृति 4 : (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न. आश्रमों की आवश्यकता’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

उत्तर: हमारे देश में आश्रमों की कल्पना बहुत प्राचीन काल से चली आ रही है। राजा-महाराजा बूढ़े हो जाने पर राज-पाट छोड़कर वानप्रस्थ आश्रम अपना लेते थे और अपना शेष जीवन जंगलों में कुटी बनाकर सामान्य मनुष्य की तरह बिताया करते थे। पर आज वैसा समय नहीं रहा और राजा-महाराजा भी नहीं रहे। अब समाज में नई तरह की समस्याएँ खड़ी हुई हैं। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। पति-पत्नी में संबंधविच्छेद हो रहे हैं। इसका प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। ऐसे में बच्चे घर से भागते हैं।

वृद्ध माता-पिता बेटे-बहू के लिए भार लगने लगते हैं। इन सब समस्याओं ने आधुनिक ढंग के आश्रमों को जन्म दिया है। इसके परिणामस्वरूप आज देश में वृद्धाश्रम, महिला आश्रम तथा बाल-आश्रम (बाल सुधारगृह) जैसे आश्रमों का निर्माण किया जा रहा है। इन आश्रमों में तिरस्कृत, उपेक्षित और परित्यक्त बच्चों, महिलाओं और वृद्धों को सहारा मिलता है। इन आश्रमों में इन्हें अपना सुरक्षित जीवन जीने का अवसर मिलता है। आश्रम आज के समय की आवश्यकता हैं।

कृति 3 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए :

(i) बहनें – …………………………………

(ii) संस्था – …………………………………

(iii) मैं – …………………………………

(iv) पंखुड़ी – …………………………………

उत्तर:

(i) बहनें – बहन

(ii) संस्था – संस्थाएँ

(iii) मैं – हम

(iv) पंखुड़ी – पंखुड़ियाँ।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए :

(i) संगीत – …………………………………

(ii) समाज – …………………………………

(iii) कली – …………………………………

(iv) पंखुड़ी – …………………………………

उत्तर:

(i) संगीत – पुल्लिग

(ii) समाज – पुल्लिंग

(iii) कली – स्त्रीलिंग

(iv) पंखुड़ी – स्त्रीलिंग।

कृति 4 : (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न. ‘आश्रमों की व्यवस्था’ के बारे में अपना विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

उत्तर: हमारे देश में तरह-तरह के अनेक आश्रम हैं। इन आश्रमों का संचालन कुछ धर्मादा संस्थानों और सरकारी एजेंसियों द्वारा किया जाता है। इन आश्रमों की व्यवस्था संस्थानों अथवा सरकारी एजेंसियों द्वारा नियुक्त व्यक्तियों द्वारा की जाती है। कभी-कभी इन व्यक्तियों द्वारा अनुशासन अथवा अन्य किसी बात को लेकर आश्रमवासियों पर ज्यादती अथवा अत्याचार करने की खबरें भी आती रहती हैं।

अच्छा यह हो कि आश्रमों की व्यवस्था का काम आश्रमों में अपना जीवन बिताने वाले कुशल व्यक्तियों में से किसी व्यक्ति को सौंपा जाए अथवा बारी-बारी से निश्चित समय के लिए आश्रमवासियों में से कुशल व्यक्तियों को यह काम दिया जाए। इससे आश्रम में रहने वाले लोगों को व्यवस्था का कार्य सीखने का मौका मिलेगा और आश्रम में अत्याचार अथवा भ्रष्टाचार की समस्या पर भी अंकुश लगेगा। आश्रमों की समस्याओं से आश्रमवासियों से अधिक कौन परिचित हो सकता है? आश्रमवासियों के हाथ में आश्रम की व्यवस्था का काम देने से आश्रम की समस्याएँ आसानी से सुलझ सकती हैं।

प्रश्न 2. उत्तर लिखिए :

(i) पूज्य बापू जी क्या चाहते हैं?

(ii) परिच्छेद में आए दो धर्मों के नाम।

उत्तर:

(i) हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए उर्दू भाषा सीखना आवश्यक है।

(ii) (अ) हिंदू

(ब) मुस्लिम।

कृति 2 : (आकलन)

प्रश्न 1. दो ऐसे प्रश्न बनाकर लिखिए, जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों :

(i) एक-दो महीने

(ii) गुलाब।

उत्तर:

(i) जिनिया का पौधा कितने दिन फूल देने के बाद सूख गया?

(ii) अब कौन-सा फूल खिलने लगा है?

प्रश्न 2. एक/दो शब्दों में उत्तर लिखिए :

(i) काका जी द्वारा सरोज को भेजा हुआ संदेश ………..

(ii) तबीयत से कमजोर

(iii) तारों के नक्शे बनाने के लिए उपयोगी ………..

(iv) काका जी ने इन्हें अपने पास से निकाल दिया

उत्तर:

(i) उर्दू लिखना सीखो

(ii) सरोज

(iii) कंपास बॉक्स

(iv) फूल के गमले।

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