Class 10th Hindi Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय

Class 10th Hindi Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय

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आपको मार्गदर्शिका/गाइड के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमारे Pdf स्वाध्याय का उपयोग करने के बाद आपको उनकी आवश्यकता नहीं होगी। इस पोस्ट के अंत में आपको सभी Pdf फाइलें मिल जाएंगी, इसलिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप पूरा लेख पढ़ें।

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Maharashtra state Board10thChapter 1 भारत महिमा

Class 10 Hindi Lokbharati Solutions Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय (questions answers):

Bharat Mahima 10th class Hindi questions answers

यहां आपको वह मिलेगा जिसका आप इंतजार कर रहे थे। शिक्षक, माता-पिता और छात्र, अब आप महाराष्ट्र राज्य बोर्ड द्वारा कक्षा 10वीं हिंदी लोकभारती Chapter 1 भारत महिमा स्वाध्याय की Pdf फाइल नीचे पा सकते हैं। नीचे आप पीडीएफ फाइल देख सकते हैं जिसे डाउनलोड किया जा सकता है लेकिन आगे बढ़ने से पहले, कृपया नीचे दिए गए हमारे दिशानिर्देशों का पालन करें।

पीडीएफ फाइल कैसे डाउनलोड करें?

नीचे आपको हमारी Pdf फाइल दिखाई देगी जिसके नीचे आपको एक मेन्यू बटन भी दिखाई देगा। अगला पेज देखने के लिए आपको नेक्स्ट बटन पर क्लिक करना होगा। इस तरह आप सभी प्रश्न और उत्तर पीडीएफ फाइल में देख पाएंगे।

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Class 10th Hindi Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय भावार्थ:

Class 10th Hindi Chapter 1 Bharat Mahima bhavarth

भारत महिमा कविता का सरल अर्थ

1. हिमालय के आँगन …………………………………… मधुर साम संगीत।. . .

हमारा यह प्यारा भारत देश हिमालय के आँगन के समान है। प्रतिदिन उषा भारत को सूर्य की किरणों का उपहार देती है। तब ऐसा लगता है मानो हँसकर वह भारत-भूमि का अभिनंदन कर रही हो। ओस की बूंदों पर जब प्रातःकालीन सूर्य की रश्मियाँ पड़ती हैं तो ऐसा लगता है जैसे उषा ने भारत को हीरों का हार पहना दिया हो।

सबसे पहले ज्ञान का उदय भारत में ही हुआ अर्थात सबसे पहले हम जाग्रत हुए। फिर हमने पूरे विश्व में ज्ञान का प्रसार किया। इसके कारण समग्र संसार आलोकित हो गया। अज्ञान रूपी अंधकार का विनाश हुआ और संपूर्ण सृष्टि के सभी दुख-शोक दूर हो गए।

वाणी की देवी वीणापाणि (सरस्वती) ने इसी पवित्र भूमि पर प्रेम के साथ अपने कमल के समान कोमल करों में वीणा उठाई, उसकी झंकार से सप्तसिंधुओं में सातों स्वरों का मोहक सरगम गूंजने लगा, मधुर संगीत का जन्म हुआ। इसी महान देश में संगीत के वेद सामवेद की रचना हुई।

2. विजय केवल …………………………………… आए थे नहीं।. . .

भारत के लोगों ने शस्त्रों के बल पर देशों को नहीं जीता। यहाँ प्राचीन काल से ही लोगों के मन में धर्म की प्रखर भावना रही है और उन्होंने संसार में धर्म का प्रचार किया। यहाँ गौतम बुद्ध और वर्धमान महावीर जैसे धर्मपुरुष हुए हैं, जिन्होंने विशाल साम्राज्य छोड़कर भिक्षु का स्वरूप धारण किया और घर-घर घूमकर लोगों का कष्ट दूर करने का प्रयास किया, धर्म का प्रचार किया। हमने मोहम्मद गोरी को पराजित करने के बाद भी दयापूर्वक क्षमा कर दिया। हमारे देश से ही चीन को धर्म की दृष्टि मिली। (भारत के महान सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए चीन, स्वर्ण भूमि अर्थात जावा और श्रीलंका भेजा) जावा और श्रीलंका के लोगों को पंचशील (अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, सत्य, ब्रह्मचर्य आदि) के सिद्धांत मिले।

भारतवासियों ने कभी किसी की संपत्ति या किसी का राज्य छीनने का प्रयास नहीं किया। हमें प्रकृति ने प्रत्येक वस्तु मुक्तहस्त से प्रदान की। प्रकृति की हमारे देश पर महान कृपा रही है। (यहाँ की शस्य श्यामला भूमि, हिमाच्छादित गिरि शिखर, घाटियाँ, वादियाँ, सदानीरा नदियाँ, झरने, फल-फूल, संसाधनों से भरपूर जंगल सभी अनुपम हैं) भारत सदा से हमारी जन्मभूमि है। हम इसी देश की संतानें हैं। हम बाहर के किसी स्थान से आकर यहाँ नहीं बसे हैं। (जैसा कि कुछ विदेशियों का कहना है।)

3. चरित थे पूत …………………………………… प्यारा भारतवर्ष।. . .

भारत के लोग सदा से चरित्रवान रहे हैं। हमारी भुजाओं में भरपूर शक्ति रही है। भारतीयों में वीरता की कभी कमी नहीं रही। साथ ही नम्रता सदा हमारा गुण रहा है। हमने कभी अपनी उपलब्धियों पर घमंड नहीं किया। हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर गर्व रहा है। हम कभी किसी को दुखी नहीं देख सके। दीन-दुखियों की सेवा करने के लिए हम भारतीय सदैव तत्पर रहते हैं। ‘हम यदि धन और संपत्ति का संग्रह करते भी थे, तो दान के लिए करते थे। दानवीरता भारतीयों का गुण रहा है। हमारे देश में अतिथियों को सदा देवता के समान माना जाता था। भारत के लोग सत्य बोलना अपना धर्म मानते थे। (भारतीय सत्यवादी हरिश्चंद्र की संतानें हैं।) हमारे हृदय में तेज था, गौरव था। हम सदा अपनी प्रतिज्ञा पर अटल रहते थे। प्राण जाए, पर वचन न जाए हमारा जीवनमूल्य रहा है।

आज भी हम भारतीयों की धमनियों में उन्हीं पूर्वजों का रक्त प्रवाहित हो रहा है। आज भी हमारा देश वैसा ही है। आज भी भारतीयों में वैसा ही साहस है। भारतीय आज भी ज्ञान के क्षेत्र में सबसे आगे हैं। आज भी हम पहले के समान शांति के पुजारी हैं। देशवासियों में वैसी ही शक्ति है। हम उन्हीं आर्यों की दिव्य संतानें हैं।

हम जब तक जिएँ, इसी देश के लिए जिएँ। हमें इसकी सभ्यता और संस्कृति पर अभिमान है और हर्ष है कि हमने इस भूमि पर जन्म लिया है। यह हमारा प्यारा भारतवर्ष है। यदि कभी आवश्यकता पड़े, तो इसके लिए अपना सर्वस्व भी न्योछावर कर दें।

Class 10th Hindi Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय पद्य विश्लेषण:

Class 10th Hindi Chapter 1 Bharat Mahima Padya Vishleshan

पदय विश्लेषण
सूचना: यह प्रश्नप्रकार कृतिपत्रिका के प्रारूप से हटा दिया गया है। लेकिन यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक में होने के कारण विद्यार्थियों के अधिक अभ्यास के लिए इसे उत्तर-सहित यहाँ समाविष्ट किया गया है।

Class 10th Hindi Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय सरल अर्थ:

Class 10th Hindi Chapter 1 Bharat Mahima saral Arth

Class 10th Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय सरल अर्थ भावार्थ में दिया गया है। उदाहरण के लिये एक पद्य का सरळ अर्थ नीचे दिया जा राहा है। आप से अनुरोध है की ऊपर दिए हुए भावार्थ का अध्ययन करे।

1. हिमालय के आँगन …………………………………… मधुर साम संगीत।. . .

हमारा यह प्यारा भारत देश हिमालय के आँगन के समान है। प्रतिदिन उषा भारत को सूर्य की किरणों का उपहार देती है। तब ऐसा लगता है मानो हँसकर वह भारत-भूमि का अभिनंदन कर रही हो। ओस की बूंदों पर जब प्रातःकालीन सूर्य की रश्मियाँ पड़ती हैं तो ऐसा लगता है जैसे उषा ने भारत को हीरों का हार पहना दिया हो।

सबसे पहले ज्ञान का उदय भारत में ही हुआ अर्थात सबसे पहले हम जाग्रत हुए। फिर हमने पूरे विश्व में ज्ञान का प्रसार किया। इसके कारण समग्र संसार आलोकित हो गया। अज्ञान रूपी अंधकार का विनाश हुआ और संपूर्ण सृष्टि के सभी दुख-शोक दूर हो गए।

वाणी की देवी वीणापाणि (सरस्वती) ने इसी पवित्र भूमि पर प्रेम के साथ अपने कमल के समान कोमल करों में वीणा उठाई, उसकी झंकार से सप्तसिंधुओं में सातों स्वरों का मोहक सरगम गूंजने लगा, मधुर संगीत का जन्म हुआ। इसी महान देश में संगीत के वेद सामवेद की रचना हुई।

Class 10th Hindi Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय : Notes

Class 10th Hindi Chapter 1 Bharat Mahima notes:

जब हम कक्षा 10 का हिंदी लोकभारती पाठ 1 "भारत महिमा" पढ़ रहे हैं, तो हम देख सकते हैं कि इस पाठ के बीच में कई प्रश्न पूछे जाते हैं और छात्रों से उनके उत्तर की अपेक्षा की जाती है। कुछ छात्रों को उत्तर देते समय कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन हम आपसे वादा करते हैं कि हमारे उत्तर की समीक्षा करने के बाद, आपको ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए आत्मविश्वास मिलेगा। हमारे विशेषज्ञ टीम शिक्षक ने प्रश्न पत्र को कई भागों में विभाजित किया है, जिससे आपको पाठ को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। निम्नलिखित मुद्डो पर एक नज़र डालें:

  • Chapter 1 भारत महिमा (आकलन कृती)
  • Chapter 1 भारत महिमा (मुहावरा)
  • Chapter 1 भारत महिमा (अतिरिक्त प्रश्नोत्तरे)
  • Chapter 1 भारत महिमा (व्याकरण)
  • Chapter 1 भारत महिमा (शब्द संपदा)
  • Chapter 1 भारत महिमा (विरुद्धार्थी शब्द)

Class 10th Hindi Chapter 1 भारत महिमा स्वाधाय : Question Bank

Question bank for Hindi Chapter 1 Bharat Mahima:

जो छात्र वार्षिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और बोर्ड में अधिक अंक प्राप्त करना चाहते हैं, वे हमारे प्रश्न बैंक का उपयोग कर सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रश्न आपकी अंतिम परीक्षा में निश्चित रूप से पूछे जा सकते हैं।
हमारी पीडीएफ फाइल के अंत में, आपको कक्षा 10वी का हिंदी लोकभारती पाठ 1 "भारत महिमा" मिलेगा। हमारी विशेषज्ञ टीम आपको अधिक अंक प्राप्त करने में मदद करने के लिए प्रश्न बैंक पर भरोसा करती है।
हमारे शिक्षकों की विशेषज्ञ टीम ने इन सवालों के बेहतरीन जवाब तैयार किए हैं। इन सभी सवालों के जवाब हमारी पीडीएफ फाइल में हैं जो नीचे दी गई है। आप इसे अपने खाली समय में अध्ययन करने के लिए डाउनलोड कर सकते हैं। कक्षा 10 वीं हिंदी लोकभारती पाठ 1 "भारत महिमा" स्वाध्याय पीडीएफ फाइल में आपको महत्वपूर्ण प्रश्न बैंक समाधान मिलेंगे।
हमें उम्मीद है कि यह प्रश्न बैंक आपकी परीक्षा की तैयारी में आपकी थोड़ी मदद करेगा।

कृति 3: (सरल अर्थ)

प्रश्न. उपर्युक्त पद्यांश की अपनी पसंदीदा किन्हीं दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

उत्तर:

विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम भिक्षु होकर रहते सम्राट, दया दिखलाते घर-घर घूम। भारतीयों ने शस्त्रों के बल पर दूसरे देशों को नहीं जीता, बल्कि उन्होंने प्रेमभाव से लोगों के हृदय जीते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही लोगों के मन में धर्म की भावना रही है। यहाँ वर्धमान महावीर और गौतम बुद्ध जैसे त्यागी धर्मपुरुष हुए हैं, जिन्होंने अपना विशाल साम्राज्य छोड़कर भिक्षु का स्वरूप धारण किया और घर-घर घूमकर लोगों का कष्ट दूर करने का प्रयास किया, धर्म का प्रचार किया।

पद्यांश क्र. 3

प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1. निम्नलिखित पंक्तियों का तात्पर्य लिखिए:

(i) किसी को देख न सके विपन्न।

उत्तर:

(i) भारतीय कभी किसी को दुखी नहीं देख सके। दीन-दुखियों की सेवा करने के लिए हम भारतीय सदैव तत्पर रहते हैं।

प्रश्न 2. आकृति पूर्ण कीजिए:

(i) हम चरित्र के ऐसे थे – [ ]

(ii) हम दान के लिए यह करते थे – [ ]

(iii) हमारे लिए ये देवता के समान थे – [ ]

(iv) हमें अपने गौरव पर यह था – [ ]

उत्तर:

(i) हम चरित्र के ऐसे थे [पवित्र]

(ii) हम दान के लिए यह करते थे [संचय]

(iii) हमारे लिए ये देवता के समान थे [अतिथि]

(iv) हमें अपने गौरव पर यह था [गर्व]

प्रश्न 3. संजाल पूर्ण कीजिए:

उत्तर:

प्रश्न 4.

आकृति पूर्ण कीजिए:

उत्तर:

कृति 2: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1. पद्यांश से उपसर्ग वाले दो शब्द ढूँढकर लिखिए:

(i) ……………………. (ii) …………………….

उत्तर:

(i) अतिथि

(ii) अभिमान।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:

(i) पूत = …………………….

(ii) गर्व = …………………….

(iii) प्रतिज्ञा = …………………….

(iv) प्यारा = …………………….

उत्तर:

(i) पूत – पावन

(ii) गर्व = घमंड

(iii) प्रतिज्ञा = प्रण

(iv) प्रिय = प्यारा।

प्रश्न 3. पद्यांश से शब्द ढूँढकर लिखिए:

(i) पवित्र शब्द के लिए प्रयुक्त शब्द – …………………….

(ii) गरीब शब्द के लिए प्रयुक्त शब्द – …………………….

उत्तर:

(i) पवित्र शब्द के लिए प्रयुक्त शब्द – पूत

(ii) गरीब शब्द के लिए प्रयुक्त शब्द – विपन्न।

कृति 3: (सरल अर्थ)

पदय विश्लेषण

सूचना: यह प्रश्नप्रकार कृतिपत्रिका के प्रारूप से हटा दिया गया है। लेकिन यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक में होने के कारण विद्यार्थियों के अधिक अभ्यास के लिए इसे उत्तर-सहित यहाँ समाविष्ट किया गया है।

भाषा अध्ययन (व्याकरण)

प्रश्न. सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

1. शब्द भेद:

अधोरेखांकित शब्दों का शब्दभेद पहचानकर लिखिए:

(i) राजा दशरथ वृद्ध दंपति के सामने बैठ गए।

(ii) सड़क कदाचित कच्ची थी।

उत्तर:

(i) दशरथ – व्यक्तिवाचक संज्ञा।

(ii) सड़क – जातिवाचक संज्ञा।

2. अव्यय:

निम्नलिखित अव्ययों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए:

(i) बहुत

(ii) सामने

(iii) किंतु।

उत्तर:

(i) प्रयाग बहुत थक गया था।

(ii) स्कूल के सामने एक बगीचा है।

(iii) घर में दीपक तो था, किंतु उसमें तेल न था।

3. संधि:

कृति पूर्ण कीजिए:

संधि शब्दसंधि विच्छेदसंधि भेद
उज्ज्व………………………………
अथवा
प्रश्न + उत्तर………………………………

उत्तर:

संधि शब्दसंधि विच्छेदसंधि भेद
उज्ज्वलउत् + ज्वलव्यंजन संधि
अथवा
प्रश्नोत्तरप्रश्न + उत्तरस्वर संधि

4. सहायक क्रिया:

निम्नलिखित वाक्यों में से सहायक क्रियाएँ पहचानकर उनका ‘मूल रूप लिखिए:

(i) इस पद ने मोहिनी मंत्र का जाल बिछा दिया।

(ii) बालक भूमि पर लेट गया।

उत्तर:

सहायक क्रियामूल रूप
(i) दियादेना
(ii) गया। जाना

5. प्रेरणार्थक क्रिया:

निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए:

(i) दौड़ना

(ii) बोलना

(iii) रोना।

उत्तर:

क्रियाप्रथम प्रेरणार्थक रूपद्वितीय प्रेरणार्थक रूप
(i) दौड़ना।दौड़ानादौड़वाना
(ii) बोलनाबुलानाबुलवाना
(iii) रोनारुलानारुलवाना

6. मुहावरे:

(1) निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:

(i) दृष्टि फेरना

(ii) राह देखना।

उत्तर:

(i) दृष्टि फेरना।

अर्थ: नजर डालना।

वाक्य: नेताजी ने श्रोताओं पर दृष्टि फेरी।

(ii) राह देखना।

अर्थ: प्रतीक्षा करना।

वाक्य: विद्यार्थी कई दिनों से छुट्टियों की राह देख रहे थे।

(2) अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए कोष्ठक में दिए गए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए: (सपने की संपत्ति होना, चल बसना, भनक पड़ना)

(i) हफ्ते भर की बीमारी में मरीज चला गया।

(ii) दारोगाजी ने उड़ती हुई खबर सुनी कि कल दंगा होने वाला है।

(ii) ऐसा भूकंप आया कि क्षण भर में सारी चहल-पहल विलुप्त हो गई।

उत्तर:

(i) हफ्ते भर की बीमारी में मरीज चल बसा।

(ii) दारोगाजी के कान में भनक पड़ी कि कल दंगा होने वाला है।

(iii) ऐसा भूकंप आया कि क्षण भर में सारी चहल-पहल सपने की संपत्ति हो गई।

7. कारक:

निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए:

(i) नारी महान है।

(ii) वह किसी को किसी प्रकार की कमी नहीं होने देती।

(iii) प्रेरणा का सूक्ष्म प्रभाव होता है।

उत्तर:

(i) नारी – कर्ता कारक

(ii) किसी को – कर्म कारक

(iii) प्रेरणा का – संबंध कारक।

8. विरामचिह्न:

निम्नलिखित वाक्यों में यथास्थान उचित विरामचिह्नों का प्रयोग करके वाक्य फिर से लिखिए:

(i) क्या बताऊँ गाय ने दूध देना बंद कर दिया है बूढ़ी हो गई है इस जमाने में गाय भैंस पालने का खर्चा

(ii) हे मेरे मित्रो परिचितो आओ अपने सारे बदले लेने का यही वक्त है

उत्तर:

(i) “क्या बताऊँ। गाय ने दूध देना बंद कर दिया है, बूढ़ी हो गई है। इस जमाने में गाय-भैंस पालने का खर्चा …।”

(ii) “हे मेरे मित्रो, परिचितो! आओ, अपने सारे बदले लेने का यही वक्त है।”

9. काल परिवर्तन:

निम्नलिखित वाक्यों का सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:

(i) मनु पीछे की ओर मुड़ता है। (सामान्य भूतकाल)

(ii) तुम्हारा मुख लाल होता है। (अपूर्ण वर्तमानकाल)

(iii) रोगी की अवस्था बदल जाती है। (पूर्ण भूतकाल)

उत्तर:

(i) मनु पीछे की ओर मुड़ा।

(ii) तुम्हारा मुख लाल हो रहा है।

(iii) रोगी की अवस्था बदल गई थी।

10. वाक्य भेद:

(1) निम्नलिखित वाक्यों का रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए:

(i) भारतीय चरित्र के पवित्र होते हैं।

(ii) बादल आए किंतु पानी नहीं बरसा।

उत्तर:

(i) सरल वाक्य

(ii) संयुक्त वाक्य।

(2) निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार वाक्य परिवर्तन कीजिए:

(i) तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। (आज्ञावाचक)

(ii) मास्टर जी ने पुस्तकें लाने के लिए पैसे दिए। (प्रश्नवाचक)

उत्तर:

(i) तुम अपना ख्याल रखो।

(ii) क्या मास्टर जी ने पुस्तकें लाने के लिए पैसे दिए?

11. वाक्य शुद्धिकरण:

निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके लिखिए:

(i) क्रोध से उसकी नेत्र लाल हो गए।

(ii) राम ने हिरण का शिकार की।

(iii) मैं मेरा काम करता है।

उत्तर:

(i) क्रोध से उसके नेत्र लाल हो गए।

(ii) राम ने हिरन का शिकार किया।

(iii) में अपना काम करता हूँ।

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